जहां चाह है वहां राह है

जहां चाह वहां राह है
हार की किसको परवाह है
बोले यह जमाना कुछ भी
हमें हर पल में लड़ना है
चाहे हो एक तरफ कुआं एक तरफ खाई
हमे किसी भी मोड़ पर जितनी है यह लड़ाई
आप जो कर रहे हो वह हर किसी को सही लगे यह जरूरी नहीं होता क्योंकि हर किसी का दृष्टिकोण
 एक समान नहीं होता..
तू क्यों सोचना हर किसी के बारे में आप जो कर रहे हो वह करते रहो दुनिया तो व्यस्त रहेगी आप पर नजर रखने में...
कोई भी मंजिल पाना आसान नहीं होता
हार के डर से खेलना छोड़ दे वह कभी बाजीगर नहीं कहलाता...
और जीवन एक लड़ाई है 
चाहे हो आप के खिलाफ हर कोई
लेकिन आपके साथ हमेशा रहेगी आपकी परछाई 
मंजिल हो चाहे कितनी भी कठिन
हमें हार मान कर पीछे नहीं बैठना है
अपना उद्देश्य पाने की धुन में हमें खुद से भी लड़ना है
छोड़कर यह डर दर्द और लड़ाई 
अपना हर एक कदम हमें मंजिल की तरफ बढ़ाना है
चाहे आ जाए मौत क्यों ना हमें अपना उद्देश्य पाकर ही मरना है…
क्योंकि जहां चाह वहां राह है हार की किसको परवाह है।

-Vaishanavi Tayade


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