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The Coin of World

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The Coin of the world…. As a Coin has Two Different Sides and both Sides Describes Different Values of That Particular Nation Though out the World. Like That The Picture given above shows Different sides of World Regarding Children in Their Premature Stage .   If we are going to Discuss on These The single Page could not be enough For it. There are Many Reasons For Lack of education in Children or the Child Labour.  As The Picture Show's, Four Kids Four Bag's, And The Two Sides Of The World, Specifically India. Beacuse as we see The Economic Status of India is not Much good as our Population It may be due to corruption, Nepotism, Lack of Technology ,Negligence Towards The Government school increasing attraction Towards Private school and Many More. But These Could be Changed If We want  Because India is developing country there is equal ratio of poor as well as Rich People if we analyse. So, as a Person I believe in a Fact Of Humanity there are many Facto...

बरसात और तुम

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बरसात..…. और तुम यह सावन की बहती हवा , हर पेड़ पर हरि हरि डालियों का लहंराना फूलों का महकना पंछियों का झूमना इस मौसम को और खुशनुमा बना देती है इसे देखते ही मानो मन प्रफुल्लित होता है।  लेकिन इस प्यारे मौसम में याद आती है तुम्हारी...  क्योंकि मेरे लिए इस प्यारे मौसम को सुहाना तो तुम्हारा साथ ही बना देता था... तुम्हारा हाथ पकड़ के इस बेहकाती हवा में चलना बिन मौसम बारिश होने पर इन पानी की लहरों के साथ  जुमना  अचानक से पड़ी इस ठंडी ठंडी हवा में गरम गरम भुट्टे का स्वाद चखना  जानबूझकर छतरी को उड़ा कर भिगते हुए घर चले जाना तुम्हारे साथ गंदे कीचड़ मैं भी उछलना बड़ा मजेदार लगता था… जैसे किसी मेंढक को अपने प्रिंस का हाथ मिलता था। फिर घर जाकर बालकनी में बैठकर गरम-गरम पकोड़े और अदरक वाली चाय का मजा ही कुछ और था,  साथ में तुम्हारी शायरी मचाती बहुत शोर थी मेरा यह बरसात मे  गाने को गुनगुनाना और तुम्हारा वह बेसुरा ताल पकड़ना बड़ा ही याद आता है ..  इन सब को फिर से जीने के लिए आज भी मेरी अखियां तरसती है  मानो यह बरसात जब भी आती है तुम्हारा  पै...

सफलता

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सफलता, Success एक दिन किसी ने मुझे पूछा कि सफलता क्या है? मैंने कहा कि भाई जिस दिन आप लोगों की सुनना बंद करोगे और लोग आपको सुनना पसंद करेंगे उस दिन समझलेना कि आप सफल हो गए हो। सफलता की कोई ठरावीक व्याख्या नहीं होती आप जैसे और जिस क्षेत्र में सफल होते हो वैसे आपके सफलता की व्याख्या बनती है, मानलो कि आप एक उत्तम चित्रकार हो और आप अपनी चित्रकारी में पारंगत एवं सफल बन गए हो तो कोई आपसे यह नहीं पूछेगा कि आपने पढ़ाई कितनी की है या आपके दसवीं कक्षा के गुण कितने थे, या फिर अगर आप कोई सरकारी अफसर बन गए तो लोग आपसे यह नहीं पूछेंगे कि आपकी पारंगत कला कौनसी है या फिर कभी आपने कोई चित्र निकाला है । ऐसा कोई नहीं पूछेगा इसीलिए आप जिस क्षेत्र में पारंगत  एवं सफल हो वहीं से आपकी सफलता की व्याख्या की जाती है इसीलिए सफलता की कोई ठरावीक व्याख्या नहीं होती… सफलता के सिर्फ तीन स्तंभ होते हैं वे है  आत्मविश्वास, एकाग्रता और योगदान जिस दिन आप इन तीनों को अपनी जीवन में लाएंगे उस दिन आप सफलता की सीढ़ी का पहला पय्या चढ़ेंगे… क्योंकी फरेब से की गई जीत कभी सफलता नहीं कहलाती और सच्चाई से जीती ह...

जहां चाह है वहां राह है

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जहां चाह वहां राह है हार की किसको परवाह है बोले यह जमाना कुछ भी हमें हर पल में लड़ना है चाहे हो एक तरफ कुआं एक तरफ खाई हमे किसी भी मोड़ पर जितनी है यह लड़ाई आप जो कर रहे हो वह हर किसी को सही लगे यह जरूरी नहीं होता क्योंकि हर किसी का दृष्टिकोण  एक समान नहीं होता.. तू क्यों सोचना हर किसी के बारे में आप जो कर रहे हो वह करते रहो दुनिया तो व्यस्त रहेगी आप पर नजर रखने में... कोई भी मंजिल पाना आसान नहीं होता हार के डर से खेलना छोड़ दे वह कभी बाजीगर नहीं कहलाता... और जीवन एक लड़ाई है  चाहे हो आप के खिलाफ हर कोई लेकिन आपके साथ हमेशा रहेगी आपकी परछाई  मंजिल हो चाहे कितनी भी कठिन हमें हार मान कर पीछे नहीं बैठना है अपना उद्देश्य पाने की धुन में हमें खुद से भी लड़ना है छोड़कर यह डर दर्द और लड़ाई  अपना हर एक कदम हमें मंजिल की तरफ बढ़ाना है चाहे आ जाए मौत क्यों ना हमें अपना उद्देश्य पाकर ही मरना है… क्योंकि जहां चाह वहां राह है हार की किसको परवाह है। -Vaishanavi Tayade

मेरी अधूरी रचना

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जिंदगी के हर एक लम्हे को खूबसूरत बनाया था तुम्हारे साथ हर सुनहरे पल को आंखों में सजाया था तुम्हारे साथ आने वाले हर पल को जी लिया था तुम्हारे साथ  हर वह सपना जो मुझे प्यारा है वह सजाया था तुम्हारे साथ हर अनजाने मोड़ पर कदम बढ़ाया था तुम्हारे साथ जीवन जीने का हर तरीका अपनाया था तुम्हारे साथ….. लेकिन पता नहीं था कि तुम होकर भी गुमनाम हो जाओगे । मेरी बनी बनाई इस रचना को तुम अधूरा ही छोड़ जाओगे... क्योंकि मेरे जीवन की हर रचना मैंने रचाई थी तुम्हारे साथ… लेकिन छोड़ गए जो तुम मुझे देके ये अधूरी रचना मेरे हाथ…. -Vaishanavi Tayade

पर्यावरण और हमारा अस्तित्व

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पर्यावरण और हमारा अस्तित्व.  कैसा होगा पर्यावरण और हमारा अस्तित्व कभी सोचा है ? जैसे बिना पानी के झरने का बेहना, जैसे बिना बारिश के मिट्टी से खुशबू आना, जैसे बिना हवा के फुल का मेहकना, जैसे बिना आत्मा के शरीर का होना... पर्यावरण हमारे जीवन का भाग नहीं है बल्कि हम पर्यावरण का भाग है उसके जितना समीप जाओगे उतना खुद को समझ पाओगे व्यस्त रेहती इस दुनिया में तुम थोड़ा सुकून भी पाओगे ... पर्यावरण के साथ-साथ अपने अस्तित्व का भी मोल जान जाओगे. क्योंकि हमसे पर्यावरण का अस्तित्व नहीं पर्यावरण से हमारा अस्तित्व है इसीलिए बदलती दुनिया में थोड़ी देर के लिए ही सही कभी ना बदलने वाले पर्यावरण यानी जो हमारा 'Surrounding Environment' है उसके समीप जाना चाहिए  और प्रकृति के साथ साथ अपने अंदर की खूबसूरती को भी पहचानना चाहिए.  क्योंकि , "स्वच्छ पर्यावरण सुंदर जीवन." - vaishanavi Tayade

अतरंगी यारी

यारों के ओ दिन चार  उसमें होती बातें हजार थोड़ी लड़ाईयां थोड़ी शरारतें आलग ही थी उस समय की हरकतें ना कोई परेशानी थी ना कोई शिकायत थी बस यारों के साथ अपनी यारी निभानी होती थी संतरा गोली जैसे मीठे और कुरकुरे जैसे  टेडे थे मेरे यार एक का पेट दुखता  तो सब हो जाते थे बिमार अगर सब मस्ती करते हैं और सिर्फ एक को गाली मिलती थी तो सब के पेट से हंसी बाहर निकलती थी टीचर की पनिशमेंट खाने के लिए तो कोई तैयार नहीं रेहता था इसीलिए तो सबके मन में घर में पूजा का एक ही बहाना था कभी बोर हो जाए तो खिड़की से कूद के भागने की भी तैयारी थी मानो या ना मानो स्कूल की बड़ी अतरंगी यारी थी चार दीवारी में बंद पंछी कि जिंदगी निरली थी पहले दिन किसी को ना जानने वाले पंछी की  सबके साथ मिलकर उड़ने की तैयारी थी मानो या ना मानो स्कूल की बड़ी अतरंगी यारी थी...