मेरी अधूरी रचना

जिंदगी के हर एक लम्हे को खूबसूरत बनाया था तुम्हारे साथ
हर सुनहरे पल को आंखों में सजाया था तुम्हारे साथ
आने वाले हर पल को जी लिया था तुम्हारे साथ 
हर वह सपना जो मुझे प्यारा है वह सजाया था तुम्हारे साथ
हर अनजाने मोड़ पर कदम बढ़ाया था तुम्हारे साथ
जीवन जीने का हर तरीका अपनाया था तुम्हारे साथ…..

लेकिन पता नहीं था कि तुम होकर भी गुमनाम हो जाओगे ।
मेरी बनी बनाई इस रचना को तुम अधूरा ही छोड़ जाओगे...
क्योंकि मेरे जीवन की हर रचना मैंने रचाई थी तुम्हारे साथ…
लेकिन छोड़ गए जो तुम मुझे देके ये अधूरी रचना मेरे हाथ….

-Vaishanavi Tayade


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