अतरंगी यारी

यारों के ओ दिन चार
 उसमें होती बातें हजार
थोड़ी लड़ाईयां थोड़ी शरारतें
आलग ही थी उस समय की हरकतें
ना कोई परेशानी थी ना कोई शिकायत थी
बस यारों के साथ अपनी यारी निभानी होती थी
संतरा गोली जैसे मीठे और कुरकुरे जैसे  टेडे थे मेरे यार
एक का पेट दुखता  तो सब हो जाते थे बिमार
अगर सब मस्ती करते हैं और सिर्फ एक को गाली मिलती थी तो सब के पेट से हंसी बाहर निकलती थी
टीचर की पनिशमेंट खाने के लिए तो कोई तैयार नहीं रेहता था
इसीलिए तो सबके मन में घर में पूजा का एक ही बहाना था
कभी बोर हो जाए तो खिड़की से कूद के भागने की भी तैयारी थी
मानो या ना मानो स्कूल की बड़ी अतरंगी यारी थी
चार दीवारी में बंद पंछी कि जिंदगी निरली थी
पहले दिन किसी को ना जानने वाले पंछी की 
सबके साथ मिलकर उड़ने की तैयारी थी
मानो या ना मानो स्कूल की बड़ी अतरंगी यारी थी...


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