तुझसे मैं प्यार कैसा करू

तुझसे मैं कैसा प्यार करू
इस प्यार का इकरार में कैसे करू
बातें तो हमारे बीच होती बहुत कम है
और इन बातों में तुझसे अपने दिल की बात कैसे करूं
तुझसे मैं प्यार कैसा करू
तू सुनता भी कहां है जो मैं बोलती हूं
लेकिन तेरी छोटी छोटी बातें भी मे ध्यान से सुनती हूं
लफ्जों में ना सही तू इशारों में बोल दे 
कम से कम मेरे सामने ही तो सही अपने दिल के सारे राज खोल दे 
कितना कुछ मुझे तुझसे कहना होता है
एक बार तो सही मेरे मन की बात को सुन ले
 देर से ही सही मेरा हाथ बस एक बार थामले
अगर मैं कुछ कह ना पाई तो तु बिन कहे ही सुन ले
मेरी हर बातों के पीछे का राज तु समझ ले
एक बार ही सही तू मुझसे मिलले रूबरू
फिर मैं सोचूंगी
कि तुझसे प्यार कैसा में करु
की तुझसे प्यार केसा में करू....

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