समझ Understanding

समझनाUnderstanding

आज तक मै यह सोचती थी
की दोस्ती सिर्फ एक दूसरे को मिलने से
उन्हें जानने से उनके साथ रहने से होती है
मगर ऐसा नहीं है ।
Sachhi Yariyan तो वह होती है जीने निभाने के लिए
जानने या मिलने की कोई जरूरत नहीं होती
उनको सिर्फ समझना काफी होता है...
इसीलिए किसी के लिए कोई भी Opinion
देने से पहले उसको समझना जरूरी होता है भले ही आप उसे ना मिलो या ना पहचानो।
क्योंकि अगर आप किसी को समझते हैं तो उसमें उस इंसान की नहीं बल्कि आपकी सोच नजर आती है
दोस्ती में तो समझना जरूरी होता है अगर आप अपने दोस्त को यार को समझ नहीं पाओगे तो आप दोस्ती कैसे निभा पाओगे 
भले ही आपका दोस्त दुनिया की नजर में गलत होगा लेकिन अगर आप उसे समझते हो तो वह आपके लिए बिल्कुल सही होगा क्योंकि किसी को समझने के लिए बड़े पन कि नहीं बड़े मन की आवश्यकता होती है
और समाज हर रिश्ते को मजबूत करती है
फिर चाहे वह पास तो हो या दुर का
अगर आप एक दूसरे को समझते हो तो आप दूर रहकर भी पास है और आकर आप के बीच में एक दूसरे को समझने की समझ ही नहीं है तो आप एक दूसरे के करीब रहकर भी दूर हो सकते हो
रिश्ता कौन सा है रिश्ता कैसे है यह सब चीजें मायने नहीं रखती आप उस व्यक्ति को कैसे समझते हो और उसे समझ कर आप अपना रिश्ता कैसे निभाते हो यह जरूरी होता है
किसी को समझने के लिए कोई डिग्री या लेबल की जरूरत नहीं होती सिर्फ अपना मन साफ होना चाहिए समझना अपने आप आसान हो जाएगा।
और किसी को समझने का आपका दृष्टिकोण आपकी सोच को दर्शाएगा नाही की दूसरों की हकीकत को ।

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